अघोरी बाबा कौन हैं? अघोरी विद्या – अघोरी मंत्र का रहस्य (Black Magic)

अघोरी बाबा का रहय्स
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अघोरी बाबा कौन हैं? अघोरी विद्या – अघोरी मंत्र का रहस्य (Black Magic)

अघोरी बाबा का रहस्य, अघोरी साधू का रहस्य

आजकल अघोरी बाबा के नाम से अनेक प्रकार की ठगी और दुकानदारी हो रही है. ये ऐसे लोग है, जो न तो ‘अघोर’ का अर्थ जानते है; न ही अघोरपंथ की साधनाओं से इनका कुछ लेना देना है. ये वेशभूषा और भय – वीभत्सता के द्वारा लोगो को तंत्र क्रियाओं या काला जादू (Black Magic) के नाम पर ठग रहे है. क्योंकि पढ़े लिखे और आध्यात्मिक क्षेत्रों के विद्वान् भी अघोर विद्या या इसकी साधनाओं के बारे में कुछ नहीं जानते.

अघोरी विद्या – अघोर शब्द का वास्तविक अर्थ

‘अघोर’ का अर्थ निमर्ल है और यह परमात्मा, परब्रह्म, तत्व या शिव के बारे में कहा गया है. इस निर्मल तत्व की प्राप्ति एवं ज्ञान के लिए जो अघोरी के रूप में व्याप्त है, वह क्या है, यह इस पंथ को और इसकी साधानाओं के बारे में जानने पर ही ज्ञात होगा. मैं अनेक अघोर आचार्यों की संगति की है और उनसे इस अघोरी विद्या के सम्बन्ध में बहुत कुछ सिखा भी है. मैं आपको शपथ पूर्वक विश्वास दिलाता हूँ कि वेशभूषा और निभत्स क्रियाओं के नाम पर जो अघोरी विद्या व्याप्त है और इसकी या किसी अघोरी बाबा की जो छवि आपके मन में है. वह झूठ है.

‘अघोर’ का अर्थ परमात्मा या शिव है. यह वह शिव नहीं है, जिसका आप ध्यान लगाते है. वह ध्यानरूप है, जिससे मस्तिष्क उनसे जुड़ता है. यह परम्सार तत्त्व रूप प्रकाश से भी लाखों गुणा सूक्ष्म एक परम चैतन्य सूक्ष्मतम तत्व है. यह तत्व अनंत तक व्याप्त है. इसका कोई आदि अंत नहीं. उपनिषदों में इसे तत्व कहा गया है. इसलिए कि एक मात्र यही शाश्वत निर्विकार, अखंडित, अमिश्रित है. यह भौतिक तत्व नहीं है, पर सभी भूतों की उत्पत्ति इससे ही होती है. यह निमर्ल परमसार ही अघोर है.

अघोरी विद्या का वास्तविक स्वरुप

अघोर पंथ में इस अघोर के छ: परमार्थ उपादेय तत्व (रूप) बताये गये है :-
  • शिव
  • शक्ति
  • ईश्वर (सदाशिव / सद्यशिव )
  • अघोरी मंत्र
  • मन्त्रेश्वर

शिव

यह परमात्मा है. इस तत्व के विषय में हम पहले ही लिख आये हैं. इनसे ही अघोर विद्या के शेष पांच रूपों की उत्पत्ति होती है.

शक्ति

यह शिव से ही उत्पन्न होती है, जैसे वायु में चक्रवात. इसमें शिव ही संरचना करते है. शरीर में भी और शक्ति में भी. यह परमात्मा की महामाया है. यह प्रकृति यानी ब्रह्माण्ड, इसमें वह परमात्मा यानि शिव ही समस्त मायाजाल प्रकट कर रहे है. यह कोई निर्माण या उत्पत्ति नहीं है. एक परमतत्व की धाराओं से बना नेटवर्क है. एक धाराओं का जाल. यह शाश्वत नियमों से उत्पन्न होकर क्रिया करता है और विस्तार करता है. और शाश्वत नियमों से ही नष्ट हो जाता है.

ईश्वर – सद्यशिव, सदाशिव

यह शक्ति का हृदय है. वह हृदय में धारण किये अपना विस्तार करती है. यह केंद्र में स्थित एक परमाणु है. वह परमाणु जो सबसे पहले परमतत्व में अस्तित्व में आता है. यही परमतत्व को खींचते हुए ब्रह्माण्ड का विस्तार करता है. यही ब्रह्माण्ड के नाभिक से अपनी प्रतिलिपियों की बौछार करके उनको हृदय (नाभिक के केंद्र) में व्याप्त करता है.

यही सदाशिव है. यही ईश्वर है. यह विश्वात्मा है और इसी का रूप कण–कण के हृदय में व्याप्त है. इसी कारण इसे सबका पिता, सबका पालक कहा जाता है. परमतत्व की आपूर्ति के बिना कोई अस्तित्त्व बना नहीं रहा सकता. और उसको खींचने की क्षमता केवल इसमें है.

यह सारा रहस्य वैज्ञानिक शोध के रूप में मेरे समस्त विश्व के विश्वविद्यालयों, रिसर्च सेंटरों, भारत सरकार के अतिरिक्त कई राज्यों की सरकारों को वैज्ञानिक मुल्यांकन के लिए भेजा जा रहा है. यह कार्य पूर्ण होते ही इसे धर्मालय पर भी उपलब्ध होगा. लोग चोरी कर लेते है, इसलिए सर्वत्र प्रसारित करके ही वहां डाला जायेगा, ताकि चिंदी चोरो पर धारा 467 की कार्यवाई की जा सके. ये हमारे साईट से मैटर चोरी करके अपने नाम से प्रसारित कर रहे है.

तत्व या शिव के इस रूप को मलयुक्त समझा जाता है, क्योंकि यह जैसे ही अस्तित्त्व में आता है, इसमें स्वयं का अहंकार उत्पन्न हो जाता है. इसी अहंकार से यह अपना पोषण, विस्तार और क्रिया करता है और ब्रह्माण्ड रुपी शरीर का निर्माण करता है. इसका यही रूप कृष्ण ने ज्ञान यक्षुओं के  द्वारा अर्जुन को दिखाया था. मैं भी आपको लाइव दिखा सकता हूँ. हाई फ्रीक्वेंसी का कैमरा चाहिए.

इसी परमाणु रूप शिव को अणु भी कहा जाता है और इसी से ब्रह्माण्ड का कण-कण निर्मित है.

अघोरी मन्त्र

अघोरी मंत्र की उत्पत्ति शिव से ही होती है इसलिए इसे भी उनका एक रूप कहा जाता है. इस मंत्र का आधार ध्वनि कम्पन है और यह शिव से ही उत्पन्न होता है. ध्वनि कम्पन का विज्ञान का एक अलग विज्ञान है. प्रत्येक ध्वनि अक्षर किसी न किसी शक्तिभाव को वहन करता है. यह पूरी सूची हमारी दूसरी साईट धर्मालय पर उपलब्ध है.

अघोर मन्त्रेश्वर

ध्वनि है, अक्षर है, उनसे बीज मंत्र बनता है, पर यह अघोरी मंत्र उत्पन्न किससे होता है? केंद्र में बैठे सदाशिव से. इसलिए वही मन्त्रेश्वर हैं. अघोर मंत्र को उत्पन्न करने वाला.

जो इन तमाम रहस्यों को नहीं जानता, वह अघोरी बाबा कैसा? इस पंथ में अहर जगह रहस्य है. श्मशान, चिता, मांस भक्षण, हड्डियों की माला, खोपड़ी आदि हर जगह जो नाटक करता है, अघोर तंत्र या अघोरी विद्या के रहस्य को नही बता सकता. इस साईट को इसलिए बनाया गया है कि आप इस सत्य को जान समझ सकें.

प्रेम कुमार शर्मा प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं शास्त्र के शोधक हैं. इन्होने अपने जीवन के शुरुवाती साल पत्रकारिता में व्यतीत किये हैं. भारतीय प्राचीन विज्ञान, तंत्र, अघोर विद्या, समुद्रिकी, ज्योतिष और वास्तु पर इनकी 150 से भी अधिक पुस्तकें समस्त भारत में प्रकाशित होकर उपलब्ध हैं, जैसे - "रावन संहिता", "मृत्यु के बाद", "जीवन के बाद जीवन" इत्यादि.

2 thoughts on “अघोरी बाबा कौन हैं? अघोरी विद्या – अघोरी मंत्र का रहस्य (Black Magic)

    1. धन्यवाद आपकी टिपण्णी के लिए. यह वेब साईट अघोर विद्या के वास्तविक स्वरुप और विज्ञानं को समझाने हेतु बनायीं गयी है. कृपया इसके प्रसार में योगदान दें. धन्यवाद.

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